Friday, April 12, 2019

कृषि वैज्ञानिक सर गंगाराम

13 अप्रैल/जन्म-दिवस
*कृषि वैज्ञानिक सर गंगाराम*

श्री गंगाराम का जन्म 13 अप्रैल, 1851 को मंगटानवाला (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। वे बचपन से ही होनहार विद्यार्थी थे। अपनी सभी परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर वे पंजाब के सार्वजनिक निर्माण विभाग (पी.डब्ल्यू.डी.) में अभियन्ता के रूप में काम करने लगे।
इस दौरान पूर्ण निष्ठा एवं परिश्रम से काम करते हुए उन्होंने शासन-प्रशासन के कार्यों में अच्छी दक्षता प्राप्त की। नगर और ग्रामीण क्षेत्र में लागू की गयी उनकी योजनाएं पूरे देश में आदर्श मानी जाती थीं। उनकी देखरेख और नेतृत्व में निर्मित रेनाला जल विद्युतगृह आज भी पाकिस्तान की सेवा कर रहा है।

एक अभियन्ता होते हुए भी उनका सर्वाधिक योगदान कृषि क्षेत्र के लिए है। उनकी मान्यता थी कि भारत मूलतः कृषि प्रधान देश है, अतः खेती की उन्नति से ही भारत उन्नति कर सकता है। उन्होंने अपनी योजना एवं प्रयोगों को अविभाजित पंजाब में लागू किया। जिस प्रयोग के लिए शासन-प्रशासन ने उन्हें अनुमति नहीं दी, उसमें उन्होंने व्यक्तिगत रूप से रुचि ली और उसे सफल करके दिखाया। इससे शासन भी उनकी बातें मानने को विवश हुआ।

पंजाब के सूखे क्षेत्रों में श्री गंगाराम ने नहरों का जाल बिछाकर सिंचाई का समुचित प्रबन्ध किया। उन्होंने शासन से मिंटगुमरी जिले में 50,000 एकड़ (200 वर्ग कि.मी.) बंजर एवं असिंचित भूमि पट्टे पर लेकर उसमें अथक परिश्रम किया।

खेती एवं सिंचाई की आधुनिक विधियों के प्रयोग से वहां तीन वर्ष में फसल लहलहाने लगी। आज देश में सर्वाधिक औसत आय पंजाब की ही है। इसका श्रेय बहुत मात्रा में श्री गंगाराम जी को ही है। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए अंग्रेज शासन ने उन्हें ‘सर’ की उपाधि से सम्मानित किया।

आर्थिक क्षेत्र में सफल होने के बाद सर गंगाराम ने सामाजिक क्षेत्रों में सुधार के प्रयास किये। उन्होंने भारत और विशेषकर पंजाब में फैली हर कुरीति एवं सामाजिक रूढ़ी का प्रखर विरोध किया। कोढ़ की तरह समाज को खा रही दहेज प्रथा और बाल-विवाह के विरुद्ध उन्होंने आवाज उठाई। वह विधवा विवाह के प्रबल समर्थक थे। साक्षरता के लिए भी उनके प्रयास सराहनीय हैं।

श्री गंगाराम किसी एक क्षेत्र, धर्म या जाति की बजाय संपूर्ण मानवता के प्रेमी थे। खेती से प्राप्त प्रचुर धन उन्होंने समाजहित में खर्च किया। वे अपने वेतन का अधिकांश भाग धर्मार्थ और सामाजिक संस्थाओं को दे देते थे। इसीलिए जनता उन्हें ‘दानवीर’ कहती थी।

लाहौर का गंगाराम अस्पताल जनता की सेवा में अग्रणी है। उन्होंने लाहौर में माॅडल टाउन का विकास किया, जहां रहने में लोग गर्व का अनुभव करते हैं। पठानकोट और अमृतसर के बीच रेल लाइन, लाहौर का मुख्य डाकघर, संग्रहालय तथा कई अन्य महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण उन्होंने ही किया। लाहौर के माल रोड पर उनकी मूर्ति स्थापित की गयी थी।

उन्होंने सेवा कार्यों के लिए ‘गंगाराम न्यास’ स्थापित कर इसके माध्यम से छात्र एवं छात्राओं के लिए अनेक विद्यालय तथा अनाथ बच्चों के लिए आवास बनवाये। पंजाब के तत्कालीन गवर्नर सर मेल्कम हेली ने कहा था कि उन्होंने एक नायक की तरह धन कमाया और संत की तरह उसे दान कर किया। 1947 में देश विभाजन के बाद उनके परिजनों ने दिल्ली में उनकी स्मृति में गंगाराम न्यास बनाया, जो सर गंगाराम अस्पताल का संचालन करता है।

इस महान विद्वान वैज्ञानिक एवं समाजसेवी का लन्दन में 10 जुलाई, 1927 को देहान्त हुआ। अंतिम संस्कार के बाद उनके भस्मावशेष गंगा और उनकी कर्मभूमि लाहौर के पास रावी नदी में विसर्जित कर दिये गये।

12अप्रैल की महत्वपूर्ण घटनाएं


1531 – जर्मनी के पूंजीपति प्रोटिस्टेंट ईसाइयों के बीच सैनिक एवं धार्मिक समझौता हुआ।
1801 – रणजीत सिंह ने खुद को पंजाब का महाराजा घोषित किया।
1801 – विलियम क्रे को कलकत्ता (अब कोलकाता) के फोर्ट विलियम कॉलेज में बंगाली भाषा का प्रोफेसर नियुक्त किया गया।
1861 – अमेरिका में दक्षिण और उत्तर राज्यों के बीच गृह युद्ध शुरू हो गया।
1927 – ब्रिटिश कैबिनेट ने 21 वर्ष की महिलाओं को वोटिग अधिकार देने का समर्थन किया।
1928 – जर्मन विमान ब्रेमेन ने अटलांटिक महासागर के पूर्व से पश्चिम की ओर पहली सफल उड़ान भरी।
1932 – स्पेन में प्रजातांत्रिक सरकार की स्थापना हुई और राजशाही शासन व्यवस्था का अंत हुआ।
1945 - अमेरिका द्वारा ओकीनावा पर आक्रमण।
1945 - जापानी मंत्रिमंडल का त्यागपत्र।
1946 – सीरिया पर फ्रांस का कब्जा समाप्त हुआ।
1955 – डॉ जोंस साक द्वारा विकसित पोलियो वैक्सीन को सुरक्षित और प्रभावी घोषित किया गया।
1961 – सोवियत संघ ने पहले इंसान यूरी गैगरीन को अंतरिक्ष में भेजा। यूरी ने वोस्टॉक नामक अंतरिक्ष यान से उड़ान भरी थी।
1973 – सूडान ने अपना संविधान बनाया।
1975 – अमेरिका ने कंबोडिया में अपनी हार स्वीकार कर पांच साल के हस्तक्षेप के बाद मामले से खुल को अलग किया।
1978 – भारतीय रेलवे के 125 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश की पहली डबल डेकर ट्रेन सिंहगढ़ एक्सप्रेस बाम्बे (अब मुम्बई) के विक्टोरिया टर्मिनल से पुणे तक चलायी गयी।
1981 – अंतरिक्ष यान कोलंबिया पहली बार प्रेक्षेपित किया गया।
1991 - खाड़ी युद्ध औपचारिक रूप से समाप्त।
1998 - गिरिजा प्रसाद कोइराला नेपाल के नये प्रधानमंत्री नियुक्त।
2006 - साइप्रस के राष्ट्रपति तासोस पापादोलस 6 दिवसीय यात्रा पर भारत पहुँचे।
2007 - पाकिस्तान ने ईरान गैस पाइपलाइन पर भारत को मंजूरी दी।
2007 - एयरलाइन्स जेट ने एयर सहारा को ख़रीदा।
2008 - भारतीय मूल के ब्रिटिश उद्योगपति और सांसद लॉर्ड स्वराजपाल के स्वामित्व वाले केपेरो समूह ने पश्चिम बंगाल के सिंगूर में मोटर वाहन के पुर्जे बनाने की तीन इकाइयों को लगाने का फ़ैसला किया।
2008 - अफ़ग़ानिस्तान में भारतीयों के एक काफ़िले पर हुए आत्मघाती हमले में दो भारतीय इंजीनियरों सहित तीन लोगों की मौत।
2010 - लुधियाना, पंजाब (भारत) के गुरु नानक देव स्टेडियम में भारतीय कबड्डी टीम ने पाकिस्तान की टीम को 58-24 से पराजित कर प्रथम विश्व कप कबड्डी प्रतियोगिता जीत ली।
2010 - ब्रिटिश-भारतीय लेखक राणा दासगुप्ता को महागाथा सोलो के लिए 2010 का कॉमनवैल्थ राइटर्स पुरस्कार देने की घोषणा की गई।
2010 - आस्ट्रेलियाई ग्लेंडा गेस्ट के 'सिडॉन रॉक' को यहाँ हुए पुरस्कार के ग्रांड फिनाले में 'श्रेष्ठ पहली पुस्तक' का अवार्ड मिला।
2009 – जिम्बाब्वे ने अपनी आधिकारिक मुद्रा ‘जिम्बाब्वे डॉलर’ का त्याग किया।
2012 – फेसबुक पर कैंडी क्रश सागा गेम को जारी किया गया (कन्फर्म नहीं)।
2013 – फ्रांस की सीनेट ने समलैंगिक विवाह को मान्यता दी।
2014- मशहूर गीतकार गुलज़ार को वर्ष 2013 के लिए दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिया गया।

12 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति👉

1885 - राखालदास बंद्योपाध्याय - प्रसिद्ध भारतीय इतिहासकार तथा पुरातत्त्ववेत्ता।
1910- केदार शर्मा - भारतीय फ़िल्म निर्देशक, निर्माता, पटकथा लेखक और हिंदी फ़िल्मों के गीतकार।
1917 - वीनू मांकड़ - भारत के महान् क्रिकेट खिलाड़ियों में से एक थे। इनका नाम विश्व के श्रेष्ठ ऑलराउंडरों में गिना जाता है।
1937 - गुलशन बावरा - हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार थे।
1943 - सुमित्रा महाजन - प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ एवं 16वीं लोकसभा की अध्यक्ष।
1954 - सफ़दर हाशमी - प्रसिद्ध मार्क्सवादी नाटककार, कलाकार, निर्देशक एवं गीतकार।
1981 - तुलसी गेबार्ड, अमेरिकी कांग्रेस में पहली हिंदू अमेरिकी सांसद हैं।

12 अप्रॅल को हुए निधन👉

1236 - इल्तुतमिश - दिल्ली (भारत) का शासक (28 अप्रैल 1236 का वर्णन मिलने से कन्फर्म नहीं)।
1723 - नेकसियर - मुग़ल वंश का 12वाँ बादशाह था।
1945 – अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट की कार्यालय में मृत्यु हुई और उप-राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन राष्ट्रपति बने।
1978 - ताज भोपाली - एक सुप्रसिद्ध शायर।
2006 - राजकुमार - कन्नड़ फ़िल्मों के अभिनेता।


  

Thursday, April 11, 2019

ज्योतिराव फूले

ज्योतिराव


विकिपीडिया

ज्योतिराव गोविंदराव फुले

भारतीय समाजसेवक, दार्शनिक


ज्योतिराव गोविंदराव फुले का जन्म 11अप्रैल 1827 पुणे में हुआ ।  भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें 'महात्मा फुले' एवं 'ज्‍योतिबा फुले' के नाम से भी जाना जाता है। सितम्बर १८७३ में इन्होने महाराष्ट्र में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन किया। महिलाओं व दलितों के उत्थान के लिए इन्होंने अनेक कार्य किए। समाज के सभी वर्गो को शिक्षा प्रदान करने के ये प्रबल समर्थक थे। वे भारतीय समाज में प्रचलित जाति पर आधरित विभाजन और भेदभाव के विरुध्द थे । 
ज्योतिराव गोविंदराव 
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जन्म11 अप्रैल 1827 
खानवाडी,[1] पुणेब्रिटिश भारत (अब महाराष्ट्र में)
मृत्यु28 नवम्बर 1890 (उम्र 63)णे, ब्रिटिश भारत
अन्य नाममहात्मा फुले/ज्योतिबा फुले/ ज्योतिराव फुले
धार्मिक मान्यतासत्य शोधक समाज
जीवनसाथीसावित्रीबाई फुले

आरंभिक जीवनसंपादित करें


कराड में स्थित एक ज्योतिबा फुले की मूर्ति
महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 1827 ई. में पुणे में हुआ था। एक वर्ष की अवस्था में इनकी माता का निधन हो गया। इनका लालन-पालन एक बायी ने किया। उनका परिवार कई पीढ़ी पहले सतारा से पुणे आकर फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करने लगा था। इसलिए माली के काम में लगे ये लोग 'फुले' के नाम से जाने जाते थे। ज्योतिबा ने कुछ समय पहले तक मराठी में अध्ययन किया, बीच में पढाई छूट गई और बाद में 21 वर्ष की उम्र में अंग्रेजीकी सातवीं कक्षा की पढाई पूरी की। इनका विवाह 1840 में सावित्री बाई से हुआ, जो बाद में स्‍वयं एक प्रसिद्ध समाजसेवी बनीं। दलित व स्‍त्रीशिक्षा के क्षेत्र में दोनों पति-पत्‍नी ने मिलकर काम किया।

कार्यक्षेत्रसंपादित करें

उन्‍होंने विधवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए काफी काम किया। उन्होंने इसके साथ ही किसानों की हालत सुधारने और उनके कल्याण के लिए भी काफी प्रयास किये। स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए ज्योतिबा ने 1848 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने कुछ दिन स्वयं यह काम करके अपनी पत्नी सावित्री को इस योग्य बना दिया। उच्च वर्ग के लोगों ने आरंभ से ही उनके काम में बाधा डालने की चेष्टा की, किंतु जब फुले आगे बढ़ते ही गए तो उनके पिता पर दबाब डालकर पति-पत्नी को घर से निकालवा दिया इससे कुछ समय के लिए उनका काम रुका अवश्य, पर शीघ्र ही उन्होंने एक के बाद एक बालिकाओं के तीन स्कूल खोल दिए।

विद्यालय की स्थापनासंपादित करें

ज्योतिबा की संत-महत्माओं की जीवनियाँ पढ़ने में बड़ी रुचि थी। उन्हें ज्ञान हुआ कि जब भगवान के सामने सब नर-नारी समान हैं तो उनमें ऊँच-नीच का भेद क्यों होना चाहिए। स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए ज्योतिबा ने 1848 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने कुछ दिन स्वयं यह काम करके अपनी पत्नी सावित्री को इस योग्य बना दिया। कुछ लोगों ने आरंभ से ही उनके काम में बाधा डालने की चेष्टा की, किंतु जब फुले आगे बढ़ते ही गए तो उनके पिता पर दबाब डालकर पति-पत्नी को घर से निकालवा दिया इससे कुछ समय के लिए उनका काम रुका अवश्य, पर शीघ्र ही उन्होंने एक के बाद एक बालिकाओं के तीन स्कूल खोल दिए।

महात्‍मा की उपाधिसंपादित करें

गरीबो और निर्बल वर्ग को न्याय दिलाने के लिए ज्योतिबा ने 'सत्यशोधक समाज' स्थापित किया। उनकी समाजसेवा देखकर 1888 ई. में मुंबई की एक विशाल सभा में उन्हें 'महात्मा' की उपाधि दी। ज्योतिबा ने ब्राह्मण-पुरोहित के बिना ही विवाह-संस्कार आरंभ कराया और इसे मुंबई हाईकोर्ट से भी मान्यता मिली। वे बाल-विवाह विरोधी और विधवा-विवाह के समर्थक थे। अपने जीवन काल में उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं- तृतीय रत्न, छत्रपति शिवाजी, राजा भोसला का पखड़ा, किसान का कोड़ा, अछूतों की कैफियत. महात्मा ज्योतिबा व उनके संगठन के संघर्ष के कारण सरकार ने ‘एग्रीकल्चर एक्ट’ पास किया। धर्म, समाज और परम्पराओं के सत्य को सामने लाने हेतु उन्होंने अनेक पुस्तकें भी लिखी





Tuesday, April 9, 2019

समान्य ज्ञान

1. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दिए गये निर्देश में एक ईवीएम की जगह अब कितने ईवीएम व वीवीपैट पर्चियों का मिलान करने के लिए कहा है?
a.    चार
b.    पांच✔️
c.    छह
d.    सात


2. ईएसपीएन इंडिया मल्टी-स्पोर्ट्स अवार्ड्स 2018 में निम्नलिखित में से किसे सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी चुना गया?
a.    विराट कोहली
b.    सौरभ चौधरी
c.    प्रदीप कुमार
d.    नीरज चोपड़ा✔️


3. ईएसपीएन इंडिया मल्टी-स्पोर्ट्स अवार्ड्स 2018 में निम्नलिखित में से किसे सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी चुना गया?
a.    सानिया मिर्ज़ा
b.    साइना नेहवाल
c.    पीवी सिंधु✔️
d.    मनु भाकर


4. निम्नलिखित में से किसे हाल ही में विश्व बैंक का अध्यक्ष चुना गया है?
a.    जिम योंग
b.    डेविड माल्पास✔️
c.    जॉर्ज कूलनी
d.    केविन क्लोनेर


5. निम्नलिखित में से किसने हाल ही में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के नए अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला है?
a.    अरविन्द त्यागी
b.    देवेन्द्र भदौरिया
c.    आशुतोष जैन
d.    विक्रम किर्लोस्कर✔️


6. निम्नलिखित में से कौन फीफा परिषद के सदस्य चुने जाने वाले पहले भारतीय बन गए हैं?
a.    सुरेश महाजन
b.    नलिन गोस्वामी
c.    प्रफुल्ल पटेल✔️
d.    गजेन्द्र अवस्थी


7. हाल ही में लक्ष्मी विलास बैंक को फाइनेंसिंग कम्पनी में विलय हेतु मंजूरी प्राप्त हुई है?
a.    इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड
b.    इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड✔️
c.    यूसी इलेक्ट्रिक फाइनेंस लिमिटेड
d.    ऊषा फाइनेंशियल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड


8. भारत के किस राज्य में हाल ही में हैब्रोस्टेम प्रजाति की मकड़ी की खोज की गई है?
a.    तमिलनाडु
b.    आंध्र प्रदेश
c.    केरल✔️
d.    तेलंगाना


9. मणिपुर में किस स्थान पर हुई द्वितीय विश्व युद्ध की लड़ाई की याद में 7 अप्रैल को प्लेटिनम जुबली समारोह मनाया गया?
a.    कंगला टोंगबी✔️
b.    चरखा सुताली
c.    अंगाली रेबेका
d.    रोशन सेतु


10. सिविल सेवा परीक्षा-2018 में पहले स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार का क्या नाम है?
a.    श्रेयांश कुमार
b.    अक्षत जैन
c.    शुभम गुप्ता
d.    कनिष्क कटारिया✔️

उत्तर:👇🇮🇳
1. b. पांच
विवरण: पचास प्रतिशत वीवीपैट की गिनती की मांग वाली 21 विपक्षी पार्टियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि हर विधानसभा क्षेत्र में 1 ईवीएम की जगह अब 5 ईवीएम व वीवीपैट पर्चियों का मिलान करना होगा.
   
2. d. नीरज चोपड़ा
विवरण: भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा को वर्ष 2018 का ईएसपीएन इंडिया मल्टी-स्पोर्ट्स अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ भारतीय खिलाड़ी चुना गया.

3. c. पीवी सिंधु
विवरण: भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी और ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु को हाल ही में ईएसपीएन इंडिया मल्टी-स्पोर्ट्स अवार्ड में सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

4. b. डेविड माल्पास
विवरण: अमेरिकी सरकार ने अमेरिकी वित्त विभाग के डेविड माल्पास को विश्व बैंक के 13वें अध्यक्ष के तौर पर चुना है. विश्व बैंक के कार्यकारी बोर्ड ने आम सहमति से डेविड माल्पास को विश्वबैंक के अध्यक्ष के रूप में चयन किया.

5. d. विक्रम किर्लोस्कर
विवरण: विक्रम किर्लोस्कर ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के नए अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला लिया. कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक संगठन के अगले अध्यक्ष मनोनीत किये गये हैं.

6. c. प्रफुल्ल पटेल
विवरण: अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल फीफा (फुटबॉल की विश्व नियामक संस्था) परिषद के सदस्य चुने जाने वाले पहले भारतीय बन गए हैं.

7. b. इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड
विवरण: लक्ष्मी विलास बैंक तथा इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के विलय को हाल ही में मंजूरी प्रदान की गई है. विलय के तहत लक्ष्मी विलास बैंक के मंजूर योजना के तहत बैंक के शेयरधारकों को प्रति 100 शेयर के बदले इंडियाबुल्स के 14 शेयर मिलेंगे.

8. c. केरल
विवरण: शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा हाल ही में केरल के एर्नाकुलम में मौजूद इलिथोडु जंगलों में मकड़ी की एक नई प्रजाति की खोज की गई है. टीम ने यह भी पाया कि हैब्रोस्टेम प्रजाति से संबंधित मकड़ी वैज्ञानिकों के लिए नई प्रजाति है.

9. a. कंगला टोंगबी
विवरण: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मणिपुर स्थित कंगला टोंगबी में हुए भीषण युद्ध की याद में तथा सैनिकों के सम्मान में प्रत्येक वर्ष 7 अप्रैल को कंगला टोंगबी यादगार समारोह मनाया जाता है.

10.  d. कनिष्क कटारिया
विवरण: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 5 अप्रैल को सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी किया, इस परीक्षा में कनिष्क कटारिया प्रथम स्थान पर रहे. कनिष्क कटारिया ने IIT बॉम्बे से अपनी पढ़ाई की है.


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Monday, April 8, 2019

राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय जगत के मुख्य समाचार


🔸लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार चरम पर। पहले चरण के मतदान में सिर्फ चार दिन बाकी

🔸वरिष्‍ठ भाजपा नेता और प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा- एनडीए सरकार ने देश के पूर्वी और पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के विकास पर विशेष ध्‍यान दिया है। कांग्रेस ने एनडीए सरकार पर 2014 के आम चुनाव के वायदों से मुकरने का आरोप लगाया। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्‍ट्रीय लोकदल ने उत्‍तर प्रदेश के देवबंद में संयुक्‍त सभा को संबोधित किया

🔸निर्वाचन आयोग ने अरुणाचल प्रदेश में नकदी बरामद होने के मामले में राज्‍य के मुख्‍य चुनाव अधिकारी को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया

🔸ब्रिट्रेन की प्रधानमंत्री टेरिज़ा मे ने ब्रेक्जिट को लेकर संसदीय गतिरोध को खत्‍म करने के लिए विपक्षी नेता जेरेमी कोर्बाइन के साथ अपनी मुलाकात को सही ठहराया

🔸आईपीएल क्रिकेट में बेंगलुरू में डेल्‍ही कैपिटल्‍स ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को चार विकेट से हराया। कोलकाता ने लगाया जीत का 'चौका', राजस्थान को हराकर टॉप पर पहुंचा

💢विविध खबरें

🔺इंदौर: कमलनाथ के करीबियों पर IT की रेड, सीआरपीएफ और पुलिस के बीच नोकझोंक, शिवराज ने खोला मोर्चा

🔺दिल्ली-NCR में बदला मौसम, बारिश से शहरी लोगों को राहत तो किसानों पर आसमान से बरपा कहर

🔺नई दिल्ली: 'फिर एक बार, मोदी सरकार' के नारे पर लड़ेगी भाजपा, कैंपेन सॉन्ग भी हुआ लॉन्च

🔺मुजफ्फरनगर में कांग्रेस की बिरयानी पार्टी में बवाल के बाद चले लाठी-डंडे, हिरासत में आठ

🔺विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, 50 फीसद वीवीपैट पर्चियों की गणना हो, छह दिनों की देरी मंजूर

🔺पंजाब और हरियाणा में किसी से नहीं होगा कोई समझौता: कांग्रेस

🔺राहुल ने भ्रष्टाचार पर प्रधानमंत्री मोदी को दी बहस की चुनौती, कहा-सत्य शक्तिशाली होता है

🔺यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मायावती के भाषण पर लिया संज्ञान, जिला प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

🔺जम्मू: सुरक्षाबलों के लिए खुला हाईवे, आम नागरिकों के लिए रहा बंद, महबूबा-फारूक ने की सरकार पर टिप्पणी

🔺कांग्रेस के लिए देशभर में प्रचार करेंगे रॉबर्ट वाड्रा, जेटली का तंज- किसको होगा फायदा?

🔺चुनाव आयोग ने ममता के आरोपों का किया खंडन, कहा- आचार संहिता के दौरान तबादला उसका अधिकार

🔺भारत ने लीबिया से शांति सेना से अपने जवानों को वापस बुलाया

🔺दहशत में पाक, कहा-इस महीने फिर हमला कर सकता है भारत, MEA ने कहा- आतंकियों को उकसाने वाला बयान

🔺मालदीव में पूर्व राष्ट्रपति नशीद की पार्टी प्रचंड जीत की ओर, शुरुआती नतीजों में 62 सीटें मिलीं

🔺पाकिस्‍तान ने 100 भारतीय मछुआरे रिहा किए, कहा- सद्भाव बढ़ाने के लिए उठाया कदम

🔺यरुशलम: चुनाव में नेतन्याहू की प्रतिष्‍ठा दांव पर, इजराइली बस्तियों को देश में शामिल करने का किया है वादा

🔺सीरिया में हुई बमबारी में 13 लोगों की मौत

🔺चीनी नौसेना की 70वीं वर्षगांठ पर भारतीय नौसेना के दो जहाज आईएनएस 'कोलकाता' और 'शक्ति' चीनी नौसेना की 70वीं वर्षगांठ समारोह में हिस्सा लेंगे

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मंगल पाण्डेय


Sunday, April 7, 2019

महात्मा गाँधी का शिक्षा दर्शन


मोहनदास करमचंद गाँधी जिसे प्यार से ‘बापू’ कहते हैं । इन्हें रविन्द्रनाथ टैगोर ने ‘महात्मा’ की उपाधि प्रदान की । राष्ट्रनिर्माण में उत्कृष्ट योगदान देने के कारण इन्हें ‘राष्ट्र का जनक’ भी कहा जाता है । इन्हें सुभाष चन्द्र बोस ने ‘राष्ट्रपिता’ कहा । इस प्रकार इन्हें राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के नाम से भी हम सभी जानते हैं । इनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 में गुजरात के काठियावाड़ जिले के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था । उनके पिता करमचंद गाँधी पोरबंदर रियासत के दीवान थे । वे इमानदार, साहसी और उदार प्रकृति के थे । उनकी माता पुतली बाई साध्वी, श्रद्धालु एवं धर्मपरायण महिला थी । गाँधी जी को बाल्यकाल में ही उन्हें अपने माता-पिता से नैतिक संस्कारों का बहुत गहरा असर पड़ा । सत्य और अहिंसा के अग्रदूत गाँधी जी की जीवन दृष्टि भारत के सामाजिक राजनैतिक और शैक्षिक जन-जीवन को प्रभावित किया । 30 जनवरी, 1948 को वे हमसभी के बीच नहीं रहे ।
भारतीय प्राचीन शिक्षा गुरुकुल प्रणाली की थी । आज की तरह वह व्यावसायिक नहीं थी । गुरुकुल का खर्च गाँव के समृद्ध किसान उठाते थे । गुरुकुल में बच्चे सेवा भाव से शिक्षार्जन करते थे और माता-पिता, गुरु, समाज के प्रति अपने नैतिक कर्तव्यों को समझते हुए समाज और देश के निर्माण में अपना योगदान देते थे । इस तरह की शिक्षा व्यवस्था को गाँधी जी ‘द व्यूटीफुल ट्री’ कहते थे । क्योंकि उन्हें मालूम था कि भारत में शिक्षा सरकारों के बजाय समाज से संचालित होती थी । उन्होंने शिक्षा को परिभाषित करते हुए कहा था कि “शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक तथा मनुष्य में निहित शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक श्रेष्ठतम शक्तियों का अधिकतम विकास है । उस शिक्षा से व्यक्ति समाज और देश की राजनैतिक, आर्थिक एवं सामाजिक दासता का विरोध कर स्वतंत्र एवं आत्मनिर्भर हो सकता है ।” वे शिक्षा को सार्वभौमिक रूप से प्रसारित करना चाहते थे ।
भारत में अंग्रेजों द्वारा विकसित शिक्षा पद्धति कई प्रकार से हमारे लिए हानिकारक थी । उन्होंने हमारी भाषा और संस्कृति को बुरी तरह से प्रभावित किया । गाँधी जी को उनकी शिक्षा पद्धति को लेकर जो खामिया दिखी वे इस प्रकार हैं –
यह विदेशी संस्कृति पर आधारित थी जिसने स्थानीय संस्कृति समाप्त कर दी ।
यह ह्रदय और हाथ की संस्कृति की उपेक्षा कर दिमाग तक सिमित कर देता है ।
विदेशी भाषा के माध्यम से सही शिक्षा संभव नहीं है ।
गाँधी जी अंग्रेजी शिक्षा को मानसिक गुलामी का कारण बताते हुए कहते हैं कि “अंग्रेजी शिक्षा लेकर हमने राष्ट्र को गुलाम बनाया है । अंग्रेजी शिक्षा से दंभ, राग, जुल्म, वगैरह बढे हैं ।” इसी यथास्थिति को भांपते हुए वे अंग्रेजो के विरुद्ध असहयोग आन्दोलन का नेतृत्व किया । इस आन्दोलन के तहत गाँधी जी ने हिन्दुस्तानियों से सरकारी संस्थानों के बहिष्कार का आह्वाहन किया । औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली की जगह उन्होंने एक राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली का विकास किया । इस राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत मानव श्रम को उसका उचित स्थान देते हुए मनुष्य के ह्रदय और मस्तिष्क का समन्वित विकास करना था ।
गाँधी जी एक महान राजनीतिक, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सेवक, चिन्तक एवं उच्च कोटि के शिक्षा शास्त्री थे । उनका दृढ़ विशवास था कि शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जिससे भारतीय समाज उन्नति कर सकता है । उन्होंने शिक्षा पर विशेष बल देकर उसपर कई प्रयोग किये । उन्होंने शिक्षा के विभिन्न पक्षों पर गहन चिंतन किया और अनेक पुस्तकें भी लिखी । जैसे - सच्ची शिक्षा, शिक्षा की समस्या, शिक्षा नयी तालीम की ओर, हिन्द स्वराज, दिल्ली डायरी, आश्रम वासियों से आदि ।
देश के प्रमुख शिक्षा विदों में गाँधी जी का नाम भी शामिल है । गाँधी जी के शिक्षा सम्बन्धी विचार विभिन्न पक्षों पर इस प्रकार है ।
गाँधी जी ने स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है कि “शिक्षा से मेरा तात्पर्य बालक तथा मनुष्य के शारीरिक, मानसिक तथ आत्मा के भीतर विद्यमान गुणों का सब प्रकार से सर्वोत्तम विकास करना है ।” उन्होंने बार-बार इस बात पर बल दिया है कि साक्षरता न तो शिक्षा का अंत है और न ही आरम्भ, यह केवल एक साधन है । जिस व्यक्ति को शिक्षित किया जाता है । वे सच्ची शिक्षा के सन्दर्भ में कहते हैं “दिमाग को हाथ के काम द्वारा शिक्षा मिलनी चाहिए । मैं कवि होता तो हाथ की पांच उँगलियों की अद्भुत शक्तियों के बारे में कविता लिखता । दिमाग ही सबकुछ है और हाथ पैर कुछ नहीं, ऐसा आप क्यों मानते हैं ? जो अपने हाथ को शिक्षा नहीं देते, जो शिक्षा की सामान्य रुढ़ि में से होकर निकलते हैं, उनका जीवन नीरस बन जाता है...दिमाग खाली शब्दों से थक जाता है और बच्चे का मन भटकने लगता है । हाथ न करने लायक काम करते हैं, आँखे न देखने लायक चीजें देखती हैं, कान न सुनने लायक बातें सुनते हैं और उनको क्रमशः जो कुछ करना, देखना और सुनना चाहिए, उसे वे करते, देखते और सुनते नहीं हैं...जो शिक्षा हमें अच्छे बुरे का भेद करना एवं अच्छे को ग्रहण करना और बुरे को त्यागना नहीं सिखाती, वह शिक्षा सच्ची शिक्षा नहीं है ।”
गाँधी जी ने अपने शिक्षा दर्शन में बुनियादी शिक्षा की बात की है जिसका अर्थ है जीवन की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी शिक्षा । गाँधी जी का शिक्षा दर्शन उनके दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और इंडिया में मिले अनुभवों पर आधारित है । गाँधी जी सर्वोदय अर्थात सबका हर तरह से कल्याण हो, सबके हित में अपना हित समझना ही सर्वोदय है । वे इस बात को हमेशा ही महत्व देते थे । वे श्रम के प्रति एक उचित नजरिया पैदा करना ही शिक्षा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य मानते थे । उनका मानना था कि शिक्षा का लक्ष्य समाज को संगठित करना तथा श्रम के प्रति उचित दृष्टिकोण पैदा करना होना चाहिए । उनके अनुसार समाज ऐसा हो जिसमें सब मिलकर रह सकें और यह कार्य शिक्षा द्वारा ही संभव था । उन्होंने मेहनत, मजदूरी करने वालों के प्रति सम्मान की भावना से देखने के लिए शिक्षा को एक महत्वपूर्ण औजार माना ।
हमारी शिक्षा सामाजिक जरूरतों का दर्पण होता है । अर्थात, जो शिक्षा है वह समाज की जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए । गाँधी जी का मानना था कि लड़कों को जो कुछ सिखाया जाय वह दस्तकारी उद्योग के माध्यम से सिखाया जाय । वे चाहते थे कि बालक को वर्ण सिखाने से पहले कटाई की कला सिखाई जाय । गाँधी जी शिक्षा में बालक को केंद्र बिंदु मानते थे और ऐसा मानना मनोवैज्ञानिक भी था । हाथ, ह्रदय और मस्तिष्क का समन्वय उनकी शिक्षा का आधार था ।
उनके अनुसार शिक्षित व्यक्ति का मतलब एक आत्मनिर्भर व्यक्ति था अर्थात ‘शिक्षा को ऐसा ही होना चाहिए जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाये’ । शिक्षा एक अहिंसक सामाजिक बदलाव का साधन है ।  उन्होंने स्व-अनुशासन (स्व-अनुशासन के लिए सभी व्यक्तियों के लिए अलग-अलग अर्थ होता है जैसे विद्यार्थियों के लिए इसका अर्थ है सही समय पर एकाग्रता के साथ पढ़ना और दिए गए कार्य को पूरा करना) के बारे में इस प्रकार कहा था कि ‘स्व-अनुशासन किसी पर थोपा नहीं जा सकता । यह दैनिक जरूरतों से पैदा होता है । उन्होंने स्कूलों में लोकतान्त्रिक शिक्षण की वकालत की थी जिससे शिक्षा के सामान्य रूप से लोग जुड़ सके । शिक्षा समाज को बदलने का एक अहिंसक साधन है । गाँधी जी का शिक्षा दर्शन थ्री (एच) पर आधारित है । जहाँ थ्री (एच) का मतलब हैण्ड, हार्ट तथा हेड है ।
गाँधी जी की आस्था आदर्शवाद और प्रयोजनवाद दोनों में ही थी । उनके जीवन के चार स्तम्भ हैं – अहिंसा, निर्भयता, सत्य और सत्याग्रह । महत्वपूर्ण शब्द आदर्शवाद और प्रयोजनवाद को लेकर है । जिनमें गाँधी जी की सबसे बड़ी देन रही है । सामान्यतः हम किसी भी दार्शनिक को किसी न किसी वाद से जोड़कर चलते हैं । गाँधी जी ने यह प्रयास किया है कि शिक्षा दोनों तरफ से होनी चाहिए । आदर्श वाद के रूप में भी जहाँ नैतिक मूल्यों का क्षरण नहीं हो सके और प्रयोजन वाद के रूप में भी जहाँ हम शिक्षा को जीविकोपार्जन का एक साधन बना सकें । इस प्रकार से उन्होंने आदर्शवाद और प्रायोजनवाद दोनों को साथ लेकर शिक्षा की परिचर्चा की ।
शिक्षा का तात्पर्य यह हुआ कि शिक्षा वह है जो ज्ञान प्रदान करने के साथ-साथ बालक व व्यक्ति के व्यवहार में परिमार्जन लाती है । शिक्षा के द्वारा उत्तम नागरिकों का निर्माण होना चाहिए । शिक्षा का माध्यम मातृ भाषा हो और उसका सम्बन्ध वास्तविक परिस्थिति से हो । कर्मेन्द्रियों का विकास करना भी शिक्षा का दायित्व होना चाहिए । पांच कर्मेन्द्रियाँ (वाक्, पाणी, पाद, उपस्थ, पायु) जिसे गाँधी जी ने शिक्षा के सन्दर्भ लिया है वह वास्तव में सांसारिक बंधनों से परे है । जिस विमुक्त की परिकल्पना हमारे शास्त्रों में की गयी है उसको उसने साकार कर दिया ।
गाँधी जी ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, ‘मैंने सदैव ह्रदय की संस्कृति अथवा चरित्र निर्माण को प्रथम स्थान दिया है तथा चरित्र निर्माण को शिक्षा का उचित स्थान माना है । शारीरिक एवं बौद्धिक विकास भी शिक्षा का दायित्व है । इसी प्रकार से संस्कृति शिक्षा का आधार व उसका विशेष अंग है । वह भारतीय संस्कृति, शिक्षा के माध्यम से उभरकर सामने आनी चाहिए ।’ ये वाक्य गाँधी जी ने आत्मकथा में लिखा है । उन्होंने उस संस्कृति को परिपुष्ट करने के लिए लिखा है जो हमारी भारतीय संस्कृति है । उन्होंने आगे लिखा है कि शिल्प का चुनाव बच्चों की योग्यता और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर किया जाय । शिक्षा को आत्मनिर्भर भी होना चाहिए । इस प्रकार से उन्होंने नैतिक विकास के दायित्वों को शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार माना है ।
   
गरिमा कुमारी
एम्.ए. (हिंदी)